Satellite Internet क्या है। इसके फ़ायदे और नुक़सान क्या है। Elon musk Starlink


Satellite Internet क्या है यह कैसे हर जगह इंटेरनेट की सुविधा देगा। इस तकनीक में केबल बिछाने की जरुरत नही हैं आइए जानते है इसकी पुरी जानकारी। [ Satellite Internet kya hota hai, Satellite internet kaise kam karta hai, Starlink Satellite, Project Kuiper, OneWeb, Satellite Internet in Hindi ]

आप सब को पता है अब Internet हमारे जीवन में बहुत उपयोगी हो गया है। इसके बिना हम रह नही सकते है। इंटरनेट के माध्यम से कनेक्टिविटी अब एक ‘विकल्प’ नहीं बल्कि एक तत्काल आवश्यकता बन गई है। बिल का भुगतान, यात्रा, किराने का सामान, भोजन, टेक्स्टिंग और बहुत कुछ इंटरनेट पर निर्भर करता है। यदि आवश्यकता बढ़ गई है, तो प्रयास ने भी इसे विश्वसनीय बनाना शुरू कर दिया है।

आज भी, देश में कई ऐसे क्षेत्र हैं, जहां इंटरनेट नहीं पहुंचा है। इस अंतर को खतम करने के लिए अब सैटेलाइट इंटरनेट आ गया है। जिसके जरिए दूरस्त इलाकों से लेकर पहाड़ों और घाटियों तक इंटरनेट उपलब्ध होगा।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसके लिए किसी केबल की जरूरत नहीं होगी। यह दूरसंचार कंपनियों की सबसे बड़ी कठिनाई भी है, क्योंकि हर क्षेत्र में केबल बिछाना संभव नहीं है।

Satellite internet kya hai in Hindi

Satellite Internet Kya Hai सैटेलाइट इंटरनेट क्या है?

आसान भाषा में, सैटेलाइट इंटरनेट का अर्थ है कि Internet Service Provider (ISP) अंतरिक्ष में उपग्रह को डेटा सिग्नल भेजता है। जिसकी सहायता से हमारा Internet चलता है इसके लिए आपके घर या किसी अन्य रिसेप्टर में एक डिश लगाई जाती है जिससे जिससे यह Internet को Bounce करता है।

आपको पता ही है परंपरागत रूप से केबल सहायता के साथ इंटरनेट प्रदान किया जाता है। लेकिन Satellite Internet में केबल की आवश्यकता नहीं होगी। ऐसी स्थिति में, आप हमेशा ऑनलाइन रहने के लिए सैटेलाइट इंटरनेट पर विश्वास कर सकते हैं।

Satellite Internet Company List संसार में सैटेलाइट इंटरनेट कौन-कौन तैयार कर रहा है।

1. स्पेसएक्स (Spacex) : एलोन मस्क की कंपनी ने USA और Canada में 4400 उपग्रहों के माध्यम से स्टारलिंक Satellite Broadband Internet Service देना शुरू कर दिया है।

2. अमेज़न (Amazon) : ई-कॉमर्स कंपनी को 3,200 से अधिक Satellites को Orbit में छोड़ने के लिए अमेरिकी सरकार से अनुमति मिली है। अमेज़न इस पर $10 Billion खर्च करेगा। कंपनी ने इस प्रोजेक्ट का नाम ‘प्रोजेक्ट कुइपर’ दिया है।

3. एयरटेल (Airtel) – Airtel भी 2022 में OneWeb के माध्यम से विश्व स्तर पर Broadband Services देना शुरू कर देगा। वनवेब ने 648 अंतरिक्ष यान को Orbit में भेजने की योजना बनाई है। इसमें से 74 अंतरिक्ष यान को Orbit में भेजे गए हैं।

भारत में सैटेलाइट इंटरनेट कब तक आएगा।

भारत में केंद्र सरकार ने Satellite Broadband Network के साथ ‘BharatNet’ परियोजना के तहत सीमा क्षेत्रों और नक्सल प्रभावित राज्यों और द्वीप क्षेत्रों में 5,000 ग्राम पंचायतों को जोड़ने के लिए Hughes Communications का चयन किया है।

इन ग्राम पंचायतों को मार्च 2021 तक Satellite BroadBand से जोड़ा जाएगा। ह्यूजेस कम्युनिकेशंस ने कहा कि ये 5,000 ग्राम पंचायतें हैं
पूर्वोत्तर राज्यों जैसे Manipur, Meghalaya, Tripura, Mizoram, Arunachal Pradesh में इंटरनेट सीधे सैटेलाइट से उपलब्ध होगा।

इसके साथ ही गैल्वेन घाटी, पूर्वी लद्दाख, अंडमान निकोबार और लक्षद्वीप में भी इंटेरनेट उपलब्ध होगा। सरकार का लक्ष्य है कि अगस्त 2021 तक सभी 2.5 लाख ग्राम पंचायतों को तेज गति वाली BroadBand Service से जोड़ना है।

सैटेलाइट इंटरनेट के फ़ायदे क्या है।

  1. सैटेलाइट इंटरनेट का सबसे बड़ा फ़ायदा यह है कि यह हर जगह उपलब्ध होगा।
  2. Satellite Internet केबल पर निर्भर नहीं है, इसलिए जहां भी सिग्नल, उपग्रह के रिसेप्टर्स हैं इंटरनेट वहां उपलब्ध होगा।
  3. अब कई वर्षों में सैटेलाइट इंटरनेट की गति बढ़ गई है। एक रिपोर्ट के अनुसार, कुछ उपग्रह इंटरनेट प्रदाताओं ने उपयोगकर्ताओं को 25 MBPS Download गति प्रदान करना शुरू कर दिया है
  4. अगर कभी प्राकृतिक आपदायें आ जाए तो उस समय सैटेलाइट इंटरनेट एक वरदान होगा क्योंकि, प्राकृतिक आपदाओं के दौरान, इंटरनेट केबल गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो सकते हैं।
  5. दूर दराज के इलाकों के लोगों, ग्रामीण इलाकों के छात्रों और दुर्गम जगहों पर तैनात सैनिकों के लिए सैटेलाइट इंटरनेट किसी वरदान से कम नहीं होगा।

सैटेलाइट इंटरनेट के नुक़सान क्या है।

  • जो लोग हाई-स्पीड इंटरनेट कनेक्शन चाहते हैं, उनके लिए सैटेलाइट इंटरनेट थोड़ा निराशाजनक हो सकता है।
  • उचित उपयोग की नीति की बहुत सख्त सीमाएँ हैं।
  • सैटेलाइट इंटरनेट केबल इंटरनेट से ज्यादा महंगा है।
  • धीमे इंटरनेट कनेक्शन के कारण इसके जरिए केवल Browsing ही की जा सकती हैं।
  • ऑनलाइन गेमिंग और 4G स्ट्रीमिंग अभी भी दूर की सोच हैं।
  • सैटेलाइट इंटरनेट Virtual Private Network (VPN) का समर्थन नहीं करता है।

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