Digital Signature क्या है?


दोस्तों जैसा कि हम सभी जानते हैं कि आज के समय में हर किसी के पास वक्त की कमी है पहले के समय में लोग घर बाहर दोनों जगहों का काम संभालते थे।
काम तो अब भी घर और बाहर दोनों जगह होता है मगर उसे संभालने के तरीके में बहुत परिवर्तन आ चुका है।
और इस परिवर्तन का सबसे बड़ा श्रेय जाता है Technology को जैसे जैसे Technology ने तरक्की की वैसे वैसे हर काम घर बैठे बैठे ही होने लगा।
मगर इसके अलावा भी कुछ काम ऐसे होते हैं जो बहुत ही Confidential बहुत ही Secret होते है जिसमें आपकी Identity एक बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है और बिना आपके Identity को Verify किए वो काम नहीं हो सकता है।
जैसे कि आपका Signature बिल्कुल दोस्तों अगर आपके Signature में ज़रा सी भी गड़बड़ी हो जाती है तो ये आपके लिए कई दिक्कतें पैदा कर देती है।
और कभी कभी तो आपके सिर्फ एक Signature का नकल करके लोग ना जाने कैसी कैसी धांधली कर देते हैं।
इसलिए आपके Phisically Identity को Digitally Prove करने के लिए Digital Signature का अविष्कार हुआ जो कि एक Advance Cryptography Technology पर Based है।
सन् 1977 में Ronald R और उनके साथियों ने मिलकर पहली बार RSA Algorithm का अविष्कार किया जिसकी मदद से बड़ी संख्या में Digital Signature के कोड्स को प्राप्त किया जा सकता था समय के साथ इसमें और भी बहुत Improvement होते चले गए और
ये तब से अब तक काफी Ugrade हो चुका है।
आज Digital Signature की भी उतनी ही मान्यता है जितनी कि हाथ से किए गए Signature की है।
आजकल लगभग सभी देशों ने इसकी महत्त्व को समझते हुए इसे कानूनी मान्यता दे दी है।

Digital Signature क्या है। –

Digital Signature क्या है। –

दोस्तों Digital Signature बनाने से पहले हमारा यह जानना बेहद जरूरी है कि ये
Digital Signature है क्या..??
Digital Signature आपके Aadhar Card, Pan Card, Number और Digital Signature की सेवा प्रदान करने वाली संस्था के Data से मिला कर गणित और कंप्यूटर अल्गोरिथम की सहायता से तैयार किया गया यह एक गोपनीय नंबर या कोड होता है। जिसे केवल Authentic व्यक्ति ही जानते हैं जब कभी भी आपको डिजिटल हस्ताक्षर करने की आवश्यकता होगी तो आप उस गोपनीय नंबर या कोड की सहायता से अपने Digital Signature कर सकते हैं।
Digital Signature को कोई भी Copy नही कर सकता है क्योंकि इसमें आपको Privacy Digital Signature Key और Pin मिलता है। जब तक आपके पास यह Pin है तब तक आपका Digital Signature सुरक्षित रहता है। जब आपको Privacy Key Generate किया जाता है तब इसको Compliant Cryptographic में सुरक्षित रख दिया जाता है।

Digital Signature काम कैसे करता है। –

दोस्तों हम में से बहुत ही कम लोगों को इसकी जानकारी होगी की Digital Signature कैसे काम करता है।
अगर आपको भी इसके बारे में कोई जानकारी नही है तो कोई बात नही..
चलिए हम बताते हैं कि ये Digital Signature काम कैसे करता है।
Digital Signature Paper Signature से पूरी तरह अलग होता है।
इसमे एक ख़ास तरह के Software के द्वारा Generated Public Key का Use किया जाता है। इसे हर कोई इस्तेमाल नही कर सकता है। Digital Signature को सिर्फ वही व्यक्ति इस्तेमाल कर सकता है जो कि Authorized हो Digital Signature का उपयोग करने के लिए User Id और Password की आवश्यकता होती है।
यह एक विशेष Protocol पर कार्य करती है जिसे PKI (Public Key Infrastructure) कहा जाता है। Digital Signature Provider इसी Interface का Use करके एक विशेष Algorithm के जरिये दो नंबर या दो Key जिनमे एक Public Key होती है और दूसरी Private Key होती है उसे Generate करता है।
इसके साथ ही इसमें और भी जानकारियां अगर किसी Document को Edit किया जाता है तो
उसे Edit करने वाले का नाम और साथ में Edit करने का समय और दिन भी बताता है।
जैसा कि मैंने ऊपर बताया है कि यह सिर्फ Authorize व्यक्ति के द्वारा ही इस्तेमाल किया जा सकता है।

Digital Signature कैसे बनाएं –

भारत सरकार की Ministry Of Information Technology में
Controller Of Scientific Authority
होती है। , जो कुछ Agencies को इसका License देता है कि वे User’s को Digital Cartificate जारी कर सकें. इन एजेंसियों को
Licensed Certifying Agencies जो कहा जाता है और इन्हीं के जरिये कोई भी व्यक्ति Digital Signature ले सकता है।.
आपका Signature एक Encrypted Code की तरह काम करता है।.
जब तक आप न चाहें तो आपके दस्तावेज में कोई बदलाव नहीं कर सकता है।
सुरक्षा के लिहाज से भी यह पूरी तरह सुरक्षित है। भले ही आपका Digital Signature कोई Third Party जेनरेट कर रही है। , लेकिन आपके पहली बार इस्तेमाल करते ही आपका Digital Signature थर्ड पार्टी वेंडर के Server से डिलीट हो जाता है।
आपका Digital Signature पूरी तरह से Legal और Valid है।

Digital Signature के प्रकार –

Digital Signature मुख्यत: तीन प्रकार के होते हैं।

1. CLASS 2 : Class 2 Digital Signature की जरूरत हमें तब पड़ती है जब हमें किसी कंपनी का Registration कराने या Income Tax Return फाइल करने के लिए यह एक या दो साल के लिए Issue किया जाता है। इसके बाद Cartificate को Renewal कराना पड़ता है।

2. CLASS 3 : Class 3 Digital Signature इसे एक या दो साल के लिए Issue किया जाता है। इस पीरियड के बाद User को Digital Certificate को Renewal कराना पड़ता है।

3. DGFT/DSC : यह Digital Signature Cartificate Exports और Imports के लिए होता है। इसके जरिए वे आपसी लेन-देन पुरी सुरक्षा के साथ कर सकते हैं।

Digital Signature का Legal Authentication –

ज़ाहिर अब आपके मन में ये सवाल आ रहा होगा कि क्या Digital Signature को कानूनी अधिकार कानून से मान्यता प्राप्त है।
ये Indian Law के अंतर्गत आता है।..??
तो मेरा जवाब है। , हा ये Indian Law के अंतर्गत आता है और ये Indian Law Cartified है।
Section 3 IT ACT
Information Technology Act , 2000
(जिसे 2008 में Update किया गया है।)
के अंतर्गत Digital Signature को Legal बताता है।
और अधिक जानकारी के लिए आपको Section 35 को अच्छे से समझना होगा जिसमें बहुत ही विस्तार से बताया गया है कि
इसमें कौन सी Certifying Authority Issue करेगी।
वो भी तब जब किसी Applicant ने Digital Signature Generate कर लिया है तब..।।
Ministry Of IT के तहत Digital Signature License केवल प्रमाणित अधिकारियों द्वारा जारी किए जाते हैं।
इसके साथ ही Digital Signature की एक Issue Date और Expiry Date होती है।
जिससे ये पता चलता है उसे कब जारी किया गया था और उसकी Validity कब तक की है।
Expiry Date का उपयोग Certificate Revocation List (CRL) को मैनेज करने के लिए भी किया जाता है। एक्‍सपाइरी की तारीख आने पर सर्टिफिकेट को Revocation List से हटा दिया जाता है।

Digital Signature के Uses –

हम सभी जानते हैं कि हमारे हाथ द्वारा किए गए Signature में उतनी विश्वसनीयता तथा Security नही होती जबकि Digital Signature में Security होती हैं।
इसलिए ज्यादातर E – Commerce के वेबसाइट तथा Online Documents Verification E- Filling
और Online Banking के लिए Digital Signature का प्रयोग किया जाता है जिससे कि हमारा Transaction सुरक्षित हो सकें।
और कहीं पर किसी तरह की धांधली ना होने पाए।
Digital Signature यह सुनश्चित करता है कि Message या Documents असली है और वह Authentic व्यक्ति ने भेजा है|

Digital Signature के फायदें –

1. Digital Signature का सबसे बड़ा फायदा यह है कि कोई भी अन्य व्यक्ति आपके Documents और E – Banking E – Commerce जैसे साइट्स से छेड़छाड़ नही कर सकता है।

2. दूसरा सबसे महत्वपूर्ण फायदा यह है कि
पेपरलेस ऑफिस में यह अहम भूमिका निभाता है।

3. इंटरनेट पर आधारित कोई भी लेन-देन सुरक्षित तरीके से कर सकते हैं।

4. अपनी कंपनी को रजिस्टर करने के लिए और Income Tax Return की E-Filing के लिए इसकी जरूरत होती है।

5. M.S Word, M.S Excel और PDF DOCUMENT को साइन करने के लिए Digital Signature की जरूरत होती है।

 

दोस्तों आज की पोस्ट में मैंने आपको बताया कि ये
Digital Signature क्या है और ये काम कैसे करता है।
आपको मेरा ये पोस्ट कैसा लगा मुझें जरुर बताएं।
साथ ही अगर आपके पास इस विषय से जुड़ी
कोई सवाल या जिज्ञासा है तो आप वो भी हमें
बता सकते हैं।

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