उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री सक्षम सुपोषण योजना|मुख्यमंत्री सक्षम सुपोषण योजना|यूपी सक्षम सुपोषण योजना|मुख्यमंत्री सक्षम सुपोषण योजना 2021|mukhyamantri saksham suposhan yojana

आज हम आपके लिए यूपी मुख्यमंत्री सक्षम सुपोषण योजना की जानकारी लेकर आए हैं| हम आपको बताएंगे कि उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री सक्षम सुपोषण योजना 2021 क्या है| आप किस प्रकार मुख्यमंत्री सक्षम सुपोषण योजना का लाभ उठा सकते हैं|उत्तर प्रदेश सरकार के वित्‍तीय वर्ष 2021-22 के लिए प्रस्‍तुत बजट में महिलाओं के लिए एक नई योजना ‘महिला सामर्थ्‍य योजना’ की घोषणा की गई है और इसके लिए बजट में 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है|

इसके अंतर्गत ड्राइ राशन के साथ-साथ आंगनबाड़ी केंद्रों पर रजिस्टर्ड 6 महीने से 5 साल तक के चिन्हित कुपोषित बच्चों और एनिमिया ग्रस्त 11 से 14 साल की स्कूल न जाने वाली किशोरी बालिकाओं को अतिरिक्त पोषण दिया जाएगा। जिसे अब मुख्यमंत्री सुपोषण योजना को नाम से संचालित किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री सक्षम सुपोषण योजना

सरकार द्वारा कुपोषण को दूर करने के लिए जीवनचक्र एप्रोच अपनाकर चरणबद्ध ढंग से पोषण अभियान चलाया जा रहा है ,भारत सरकार द्वारा 0 से 06 वर्ष तक के बच्चों एवं गर्भवती एवं धात्री माताओ के स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में समयबद्ध तरीके से सुधार हेतु महत्वाकांक्षी राष्ट्रीय पोषण मिशन का गठन किया गया है राष्ट्रीय पोषण मिशन अर्न्तगत कुपोषण को चरणबद्ध तरीके से दूर करने के लिए आगामी 03 वर्षो के लिए लक्ष्य निर्धारित किये गये है

UP mukhyamantri saksham suposhan yojana

योजना का नामउत्तर प्रदेश मुख्यमंत्री सक्षम सुपोषण योजना
किस ने लांच कीउत्तर प्रदेश सरकार
लाभार्थीउत्तर प्रदेश के नागरिक
उद्देश्यकुपोषित बच्चों ड्राइ राशन।
आधिकारिक वेबसाइटयहां क्लिक करें
साल2021

यूपी सक्षम सुपोषण योजना उद्देश्य एवं लक्ष्य :

1. 0-6 वर्ष के बच्चों में ठिगनेपन से बचाव एवं इसमें कुल 6 प्रतिशत,प्रति वर्ष 2%की दर से कमी लाना।
2. 0 से 6 वर्ष के बच्चों का अल्प पोषण से बचाव एवं इसमें कुल 6 प्रतिशत,प्रति वर्ष2%की दर से कमी लाना ।
3. 6 से 59 माह के बच्चों में एनीमिया के प्रसार मेंकुल 9 प्रतिशत,प्रति वर्ष 3%की दर से कमी लाना ।
4. 15 से 49 वर्ष की किशोरियों, गर्भवती एवं धात्री माताओं में एनीमिया के प्रसार में कुल 9 प्रतिशत,प्रति वर्ष 3%की दर से कमी लाना ।
5. कम वजन के साथ जन्म लेने वाले बच्चों की संख्या में कुल 6 प्रतिशत,प्रति वर्ष 2%की दर से कमी लाना ।

यूपी मुख्यमंत्री सक्षम सुपोषण योजना कुपोषण का प्रभाव

  • शरीर को लंबे समय तक संतुलित आहार न मिलने से व्यक्ति की रोग प्रतिरोधक क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जिसके कारण वह आसानी से किसी भी बीमारी का शिकार हो सकता है।
  • कुपोषण बच्चों को सबसे अधिक प्रभावित करता है। आँकड़े बताते हैं कि छोटी उम्र के बच्चों की मौत का सबसे बड़ा कारण कुपोषण ही होता है। स्त्रियों में रक्ताल्पता या घेंघा रोग अथवा बच्चों में सूखा रोग या रतौंधी और यहाँ तक कि अंधत्व भी कुपोषण का ही दुष्परिणाम है।
  • कुपोषण का सबसे गंभीर प्रभाव मानव उत्पादकता पर देखने को मिलता है और इसके प्रभाव से मानव उत्पादकता लगभग 10-15 प्रतिशत तक कम हो जाती है, जो कि अंततः देश के आर्थिक विकास में बाधा उत्पन्न करती है।

आत्‍मनिर्भर कृषि समन्वित विकास योजना