उत्तर प्रदेश फसल बीमा योजना| uttr-prdesh phsl biimaa yojnaa in hindi


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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केन्द्रीय मंत्रिमंडल ने उत्तर प्रदेश फसल बीमा योजना’ को मंजूरी दे दी, जो किसानों के कल्याण के लिए लीक से हटकर एक अहम योजना है। 

  • आज लोहिड़ी, पोंगल एवं बीहू जैसे त्यौहारों के शुभ अवसर पर किसान हितैषी सरकार ने  किसानों को उत्तर प्रदेश फसल बीमा योजना के रूप में एक बड़ा तोहफा दिया। यह योजना खरीफ 2016 से लागूहोगी।
  • किसानों के लिए बीमा योजनाएं समय-समय पर बनती रहीं हैं, किंतु इसके बावजूद अब तक कुल कवरेज23 प्रतिशत हो सका है।
  • सभी योजनाओं की समीक्षा कर अच्छे फीचर शामिल कर किसान हित में और  नए फीचर्स जोड़कर फसलबीमा योजना बनाई गई है । इस प्रकार यह योजना पुरानी किसी भी योजना से किसान हित में बेहतर है।
  • प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के अंतर्गत  फसल के अनुसार किसान द्वारा देय प्रीमियम राशि बहुत कमकर दी गई है 

उत्तर प्रदेश फसल बीमा योजना

NAIS में प्रीमियम अधिक हो जाने की दशा में एक कैप निर्धारित रहतीथी जिससे कि सरकार के द्वारा वहन की जाने वाली प्रीमियम राशि कम हो जाती थी, परिणामतः किसानको मिलने वाली दावा राशि भी अनुपातिक रूप से कम हो जाती थी।

      उदाहरण के लिए उत्तर प्रदेश के ललितपुर जिले में धान की फसल के लिए 22 प्रतिशत  था। किसान को 30 हजार रुपए के पर कैप के कारण मात्र 900 रुपए और सरकार को 2400 रुपए प्रीमियम देना पड़ता था। किंतु शतप्रतिशत नुकसान की दशा में भी किसान को मात्र 15 हजार रुपए की दावा राशि प्राप्त होती।

उत्तर प्रदेश फसल बीमा योजना में 30 हजार  पर 22 प्रतिशत  आने पर किसान मात्र 600 रुपए प्रीमियम देगा और सरकार 6000 हजार रुपए का प्रीमियम देगी। शतप्रतिशत नुकसान की दशा में किसान को 30 हजार रुपए की पूरी दावा राशि प्राप्त होगी । अर्थात उदाहरण के प्रकरण में किसान के लिए प्रीमियम 900 रुपए से कम होकर 600 रुपए।  दावा राशि 15000 रुपए के स्थान पर 30 हजार रुपए।

उत्तर प्रदेश प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना

  • बीमित किसान यदि प्राकृतिक आपदा के कारण बोनी नहीं कर पाता तो यह जोखिम भी शामिल है  उसेदावा राशि मिल सकेगी।
  • ओला,जलभराव और लैण्ड स्लाइड जैसी आपदाओं को स्थानीय आपदा माना जाएगा।  पुरानी योजनाओं केअंतर्गत यदि किसान के खेत में जल भराव (पानी में डूब)  हो जाता तो किसान को मिलने वाली दावाराशि इस पर निर्भर करती कि यूनिट आफ इंश्योरेंस (गांव या गांवों के समूह) में कुल नुक्सानी कितनी है।इस कारण कई बार नदी नाले के किनारे या निचले स्थल में स्थित खेतों में नुकसान के बावजूद किसानोंको दावा राशि प्राप्त नहीं होती थी। प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में इसे स्थानीय हानि मानकर केवलप्रभावित किसानों का सर्वे कर उन्हें दावा राशि प्रदान की जाएगी।
  • पोस्ट हार्वेस्ट नुकसान भी शामिल किया गया है। फसल कटने के 14 दिन तक यदि फसल ख्रेत में हैऔर उस दौरान  कोई आपदा आ जाती है तो किसानों  को दावा राशि प्राप्त हो सकेगी ।
  • योजना में टैक्नोलॉजी का उपयोग किया जाएगा जिससे की फसल कटाई/नुकसान का आकलन शीघ्र औरसही हो  सके और किसानों को दावा राशि त्वरित रूप से मिल सके। रिमोट सेंसिंग के माध्यम से फसलकटाई प्रयोगों की संख्या कम की जाएगी।

फसल कटाई प्रयोग के आंकड़े तत्कल स्मार्टफोन के माध्यम से अप-लोड कराए जाएंगे।

 

उत्तर प्रदेश फसल बीमा  योजना के उद्देश्य 

  • प्राकृतिक आपदा, कीट या बीमारी के कारण किसी भी अधिसूचित फसल के बर्बाद होने की स्थिति में किसानों को बीमा का लाभ और वित्तीय समर्थन देना।
  • किसानों को खेती के प्रगतिशील तरीके, उच्च मूल्य (आगत) इनपुट और कृषि में उच्चतर तकनीक अपनाने के लिए प्रोत्साहित करना।
  • खेती से होनेवाली आय को विशेष रूप से आपदा के वर्षों में स्थायित्व देने में मदद करना।

उत्तर प्रदेश फसल बीमा  योजना की  विशेषताएँ

1. इसके अधीन फसलें

निम्नलिखित वृहत समूहों की फसल, जिनके बारे में (1) फसल कटाई प्रयोग के बारे में समुचित वर्षों के आंकड़े उपलब्ध हैं और (2) प्रस्तावित मौसम में उत्पादन की मात्रा के आकलन के लिए आवश्यक फसल कटाई प्रयोग किये गये हों-

  • खाद्य फसलें (अनाज, घास और दाल)
  • तिलहन
  • गन्ना, कपास और आलू (वार्षिक वाणिज्यिक या वार्षिक बागवानी फसलें)
  • अन्य वार्षिक वाणिज्यिक  या वार्षिक बागवानी फसलें, बशर्ते उनके बारे में पिछले तीन साल का आँकड़ा उपलब्ध हो। जिन फसलों को अगले साल शामिल किया जाना है, उनकी सूचना चालू मौसम में ही दी जायेगी।

2. इसके अधीन लाये जानेवाले राज्य व क्षेत्र

  • यह योजना सभी राज्यों और संघ शासित प्रदेशों में लागू है। जो राज्य या संघ शासित प्रदेश योजना में शामिल होने का विकल्प चुनते हैं, उन्हें योजना में शामिल की जानेवाली फसलों की सूची तैयार करनी होगी।
  • निकास नियम- जो राज्य इस योजना में शामिल होंगे, उन्हें कम से कम तीन साल तक इसमें बने रहना होगा।

3. इसके अधीन लाये जानेवाले किसान

  • अधिसूचित क्षेत्रों में अधिसूचित फसल उगानेवाले सभी किसान, जिनमें बटाईदार, किरायेदार शामिल हैं, इस योजना में शामिल होने के योग्य हैं।
  • यह किसानों के निम्नलिखित समूहों को शामिल कर सकती है-
    1. अनिवार्य आधार पर- वैसे सभी किसान, जो वित्तीय संस्थाओं से मौसमी कृषि कार्य के लिए कर्ज लेकर अधिसूचित फसलों की खेती करते हैं, यानी कर्जदार किसान।
    2. ऐच्छिक आधार पर- अन्य सभी किसान, जो अधिसूचित फसलों की खेती करते हैं, यानी गैर-कर्जदार किसान।

4. शामिल खतरे और बाहर किये गये मामले

  • निम्नलिखित गैर-निषेधित खतरों के कारण फसलों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए एकीकृत आपदा बीमा किया जायेगा-
    1. प्राकृतिक आग और वज्रपात
    2. आंधी, तूफान, अंधड़, समुद्री तूफान, भूकंप, चक्रवात, ज्वार भाटा आदि।
    3. बाढ़, डूबना और भूस्खलन।
    4. सुखाड़, अनावृष्टि।
    5. कीट या बीमारी आदि।
  • युद्ध और परमाणु युद्ध, गलत नीयत तथा अन्य नियंत्रण योग्य खतरों से हुए नुकसान को इससे बाहर रखा गया है।

5. बीमित राशि-कवरेज की सीमा

  • बीमित किसान के विकल्प से बीमित फसल के सकल उत्पाद तक बीमित राशि को बढ़ाया जा सकता है। किसान अपनी फसल की कीमत को 150 प्रतिशत तक बढ़ा सकते हैं, बशर्ते फसल अधिसूचित हो और इसके लिए वे वाणिज्यिक दर पर प्रीमियम का भुगतान करने को तैयार हों।
  • कर्जदार किसानों के मामले में बीमित राशि फसल के लिए ली गयी अग्रिम राशि के बराबर हो।
  • कर्जदार किसानों के मामले में बीमा शुल्कों को उनके द्वारा लिये गये अग्रिम में जोड़ा जायेगा।
  • फसल कर्ज वितरण के मामले में भारतीय रिजर्ब बैंक  और राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) के दिशा-निर्देश मान्य होंगे।

फसल बीमा योजना लाभ 

(क) अचानक पैदा हुई स्थिति, मसलन कम बारिश को स्वतंत्र रूप से मापा जा सकता है।
(ख) इसमें दावो का भुगतान त्वरित होता है, यहां तक कि बीमा अवधि के एक पखवाड़े के भीतर दावो का निबटारा कर दिया जाता है।
(ग) कर्जदार या गैर-कर्जदार, लघु या सीमांत, मालिक या किरायेदार, बटाईदार या ठेकेदार, सभी किस्म के किसान इस योजना का लाभ उठा सकते हैं।
(घ) इसमें पारदर्शी, उद्देश्यपूर्ण और लचीला प्रीमियम और मुआवजा संरचना है, जिसे कृषि समुदाय की जरूरतों को ध्यान में रख कर तैयार किया गया है।
(ङ) इसमें कवरेज के कई विकल्प मौजूद है, जैसे बुआई विफलता, मौसमी वर्षा, वर्षा सूचकांक, फलने-फूलने का चरण आदि।
(च) वर्षा बीमा का भुगतान पारदर्शी, सक्षम और प्रत्यक्ष होता है। इसलिए यह अधिक वैज्ञानिक, सही और प्रभावी है।
(छ) वर्षा बीमा को फसल या क्षेत्र के लिए भी तैयार किया जा सकता है, जहां का पिछला आंकड़ा उपलब्ध नहीं है।

उत्तर प्रदेश फसल बीमा योजना ऑनलाइन आवेदन

उत्तर प्रदेश फसल बीमा योजना में ऑनलाइन आवेदन करने के लिए इस वेबसाइट पर क्लिक करें

क्र. सं.फसलकिसान द्वारा देय अधिकतम बीमा प्रभार (बीमित राशि का प्रतिशत)
1खरीफ2.0%
2रबी1.5%
3वार्षिक वाणिज्‍यिक एवं बागवानी फसलें5%

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